क्या सच में मोदी जी ने मगरमच्छ को मारा था…? हकीक़त तो कुछ और ही है

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हमारे देश भारत में गद्दार नेताओं और नाटकबाजों की कोई कमी नहीं है।

इस तरह के ज्यादातर नेता धर्म के नाम पर वोट मांगते पूरे देश में नजर आ जाते हैं।

लेकिन अब इन नेताओं की भूख इतनी बढ़ गयी हैं कि ये लोग देश के बच्चे बच्चे को भी राजनीति के लिए इस्तेमाल करने का इतंजाम कर बैठे हैं। देश में फेंकने का ट्रेंड जोर शोर पर जारी है।

फेंकने से नाम होता है रोशन

पूरी दुनिया में फेंकने के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं जिसमें भाला, गोला और डार्ट फेंक कर खिलाड़ी अपना और अपने देश का नाम रोशन करते हैं।

लेकिन हमारे देश में इस प्रतियोगिता का एक दूसरा रूप पांच साल पहले सामने आया है जिसको चुनाव प्रचार कहते हैं। दोनों प्रतियोगिताओं में फेंकने से नाम रोशन होता है बस आपको सबसे बेहतर फेंकना होता है।

फेंकने की कला में माहिर हैं मोदी

हमारे देश में फेंकने वाले इतनी ऊपर पहुँच जाते हैं कि वो प्रधानमंत्री तक बन जाते हैं। देश का इतिहास गवाह है कि 2014 में लगातार बड़ी-बड़ी फेंकने के बाद कैसे एक फेंकू प्रधानमंत्री बन गया।

फेंकने का ये ट्रेंड आज भी जोरों शोरों पर है और भक्त लोग इस स्टाइल को कॉपी करने की पूरी कोशिश करते हैं।

बाल नरेंद्र की फेंकू कहानियां बच्चों को बना रही बेवकूफ


फेंकने का सिलसिला सिर्फ भाषणों तक ही नहीं बल्कि कॉमिक्स तक भी पहुँच गया है। देश में फेंकू की बाल कथाओं से एक कॉमिक निकला गया है जिसमें बच्चों को बेवकूफ बनाने की साजिश को अंजाम दिया गया है।

कहानी में मगरमच्छ से जा भिड़ा था छोटा मोदी


इस फेंकू कॉमिक बुक में एक कहानी में कहा गया है कि एक बार कुछ बच्चे जिनमें बाल नरेंद्र भी एक था वाडनगर में खेल रहे थे।

खेल के दौरान जब बच्चों की बॉल पानी में गिर गई, तो नरेंद्र बॉल को बचाने के लिए मगरमच्छों से भरी झील में कूद पड़ा। और बॉल के साथ साथ एक छोटे मगरमछ को भी उठा कर साथ ले आया।

कॉमिक बुक के लेखक का किसी को नहीं पता


मजे की बात तो ये है कि इन महान गाथाओं को लिखने वाले लेखक ने अपना नाम तक इस कॉमिक में नहीं छापा है। हमें तो डर है कि कहीं ऐसी कॉमिक पढ़ कर बच्चे अपना मानसिक संतुलन न खो बैठें।

निष्कर्ष: जब कहानियां झूठी और इतनी बकवास हों कि अंधभक्त भी उन्हें हजम न कर पाएं तो लेखक भी अपना नाम छापने से हाथ खींच लेते हैं।

Source:http://viralinindia.net/narendra-modi/bal-nrendra-comic-fake-stories/57679/


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